अजहु तौ भेजो आवन सन्देसो
अजहु तौ भेजो आवन संदेसौ।
बित्यौ फागुन सावनहु बित्यौ,बीत गयौ सूनौ इकली ही रहसौ।
भावै मौहे ना साज सिंगारी,पिय बिनु दैवे ये मन कौ क्लैसौ।
सखिन सहेली के पियही लौटे,मैरो पिय जाने कौन देस बेसौ।
जबकै गए पाती ना आई,धीर धरा लेऊ कहो मन कैसो।
झूठ्यौ साँचो भैज्यौ संदेस जी,तऊ ही रही सकै "प्यारी" इस देसौ।
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