जय गावत दोऊ शुक सारी जोरि

जय गावत दोउ शुक सारि जोरि।
भेजी सखी वृंदा रंग खिरकी,करि गुणगन लीला पिय प्यारी भोरि।
शुक पिय प्यारी गावै सारिका , सुनि मीठै बैन हसे सोयी जोरि।
जागै तऊ दोउ झूठेई सोये ,    करै अरस परस रस अभी ओरि।
दरस करन हित ड्योढी आगै , सखी ललितै संग "प्यारी" बाट जोहरि।

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