तुम सम कोउ मेरौ
तुम सम कोउ मेरौ नाय होना।
जतन करो चहै जोई जितनोई,बनि आवौ हीरा चहै खरा सोना।
मीठौ बनि आवौ चहै रसकोई,रमण रस छाडि दूजौ नाय च्होना।
संग हित तुम्हरै कहिलाऊ स्वारथी,चुप सुनि लेऊ नाय कछु क्होना।
धन "प्यारी" धन बलिहि तुम्हरै,तजि संग सब संग थारै रह्औना।
Comments
Post a Comment