गिरधर म्हारा आवो जी
गिरधर म्हारा आवौ जी।
बसी मूरत अंतर जोई म्हारै,सोई नैननि दरसावौ जी।।
दई सजा घर आँगन बार-द्वारै,आय इन भाग लगावौ जी।
कोमल सेज सजा दई कुसुमनि,आवौ पिय इस पधरावौ जी।
भोग आरोगौ रूचि सौ आय,बीरा प्रेम सौ खावौ जी।
कछु ना किन्ही साज सिंगारी,प्रीति निज मोय सजावौ जी।
वारि बलिहारी जावै "प्यारी", कद ऐसौ भाग लगावौ जी।
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