अहो मानिनी प्राणन प्यारी

(श्रीजु के मानवती होने पर श्यामसुंदर की प्रेम विनय एवं सखी द्वारा मान निदान पद.... प्रेम के विभिन्न रंगों से सजा पद......)
...
अहो!मानिनी प्राणन प्यारी,तनिक हसि हेरौ।
निज चाकर जानि जानि पायन लगावौ,प्यारी!छोडियो मान हठीली,दीन तोय टेरौ।
भौंह तनी धनु करियो सूधी,लाडो!करूणा भरिकै ढुरिहो,शीश कर फेरौ।
उमड घुमड बनी बदरा बरसौ, रसीली!भरिकै रसहु बदरा,प्यासै पे उडेरौ।
कहो जोई जोई करिहु सोई,चपले!चंचलता कछु करिहौं,बाँह गल गेरौ।
नीर नैननि भरै कंठ पुकारे,रमणी!ओरहु नाय तरसावौ,करौ ना अबेरौ।
वचन हितई "प्यारी" सोई दिननकै,कुँवरि!कसिकै प्रीतम बैय्या,दीजौ ऋण मेरौ।

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