पट घूंघट के नाहीं खोले
पट घूघंट के नाहि खोले।
भेट देयकै तऊ खोलो,कर पसारि प्यारी हस बोले।
धरी बाँसुरी मानै नाही,मौरी पहलोई गावै गुण मौरे।
पखा मोरकौ जई दीन्हे,मौपे पगा नाहि जैसो तौरे।
नैनन छलकै विकल हौये,कर पकर प्यारी राजी होय।
जेई अमोलक नाहि बहावौ,खोल पट लिपट दोउ सोय।
छेडत मुकरत ओरि तरसावत,"प्यारी" पाछै ढुरै पट खोले।
Comments
Post a Comment