कहा जात मन

कहा जात मन

कहा जात रै अधमन मन मोरै।
जग फसिहै अकुलात नाहि,काहै बहतौ नैन नाहि मौरे।
टीस चबक नेकहु नाहि हौहै,काहै रहवै जग सौ नेहा जौरै।
दैखिहै नाहि कृपा दीन हौ,काहै मान करिहै बिन बात बौरै।
मिटैहु झूठौ नाम जग सौ,काहै झूठौ नाम पाछै दौरे।
होहि कहा तौ सौ कछु कबहु,काहै बैरि बैरि जे भूलतौ रै।
मना हौहि अतिही दीन टेरिहौ,कृपा पात्र होहु जुगल कौ रै।

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