बिरहा अगन

बिरहा अगन
बिरहा अगन बितानौ बड्यौ भारी।
सिल सम ह्रदय कौ धरी लीन्ही,आवन जावन श्वास रूक्यौ री।
पनघट सिल आवै जावै चिह्न पडिहै,बिरहा सौ हिय चिन्ह पड्यौ री।
नैना सूख्यौ अजु रौवतौ मैरौ,सूखी नहर सौ नैना बन्यौ री।
बड्यै दिना पिय छबि नाय देखि,आवन बात नाय सुन्यौ री।

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