वृन्दे महारानी
वृन्दे महारानी
हरिप्रिया जय वृन्दे महारानी।
युगल प्रिये मनभावनी,लीला रस कौ विस्तारिनी।
कुंज निकुंज संवारनी,मोहन अती हिय भामिनी।
सखी श्री श्यामा कौ प्यारी,शालिग्राम पिय प्यारी पटरानी।
चरण चित्त हिय लगाय रह्यै,ठाकुर चरण विराजिनी।
बिनु वृंदै भोज पावै न मोहन,मोहन लौ भोग पवावनी।
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