ए री सम रमण बदली

ऐ री! सम रमणा बदली।
तूई कारौ कारौई पिय म्हारौ,पल दीखै पल धुंधली।
बेगि धावै तुमसोई म्हारौ प्रीतम,जानै कौन बात जल्दी।
ज्योई भरिहै तुम अंतर जलसौ,त्योई भरै रससौ रसही।
"प्यारी" उर मयूरा प्यासौ दरस-कौ,पिय कहियौ आवौजी अबही।

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