नैन लड़िहै

नैन लडिहै
नैन लडिहै जबै नंद नंदन सो,कोउ ओर सौ नैन लडावू नाही।
हिय मूरत साँवली रंग चढ्यौ,नाही दूजौ रंग चढावू कोई।
नैन असुवन कौ धार बहै,दूजौ जल सौ पाय पखारू नाही।
ह्रदय वीणा कृष्ण नाम जपै,ताई दूजौ नाम न पुकारू कोई।
टहल महल कौ पावू जौ,कबहु दूजौ टहल कौ टेरू नाही।
रसराज अगै जोई शीश झुकै,कोऊ ओर को अगै झुकावू नाही।
हसि हैरै जो नंदलाल मोहै,तत् प्राण तजू पुनि धारू नाही।
प्यारी कहिहै श्वास श्वास जेहि,मिले महल टहल नाहि चाह कोई

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