स्वामिनी प्रियतम
स्वामिनी प्रियतम
मम स्वामिनी प्रियतम श्याम।
तेहि काज बसात हियहि,ताहि करत सेबा सुखाम।
मान यश कौउ कछु चाह नाय,च्यो हौहि इन्ही को काम।
स्वामिनि चरण तेही देखिहे,ताकै रोम कूप घनश्याम।
स्वामिनी स्वामी होय भजत हौ,ताई हम उनकेई हमरै श्याम।
सेब्य जुगल जोरी हमहो ही,हिय करिहै जुगल बिश्राम।
ऐसो भाव होय हिय प्यारी,ऐसो बिनती करत भौर शाम।
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