छलिया छल

छलिया छल
माई री,छलिया छल किन्ही।
डूबौयी मोय नैन जल सिंधु,सुधि नाय लिन्ही।
पहिलौ पहल बैन मीठौ बौलै,अपनी सी किन्ही।
बस कर सबहि मैरौ माई,जानत नाय मौहै।
रौग ऐसौ दैय सिधारौ,बैद्य ना कौऊ मिलिहै।
अबहि रौवत रौवत पुकारू,कान परत ना सुनै।
प्यारी दशा बिगरत अबहु,हिय कौ ना बात गुनै।

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