मोहे ! भाँवति ननद कौ पूत
मोहै !भाँवति नंद कौ पूत।
जाकी बाँकी एकही चितवनि,सरबस लई गई लूट।।वोई मोहै! भाँवति नंद कौ पूत।
जानत जाकि ठगौरि बिगारी,सखियन जूथ कौ जूथ।।ताई मोहै! भाँवति नंद कौ पूत।
मिलै बतियावै वाकोई तबसौ,कहा लेनौ साचि झूठ।।जोई होहै! भाँवति नंद कौ पूत।
आप गई ओरनही बिगारी,साँचि रोग "प्यारी" छूत।।साई मोरै! भाँवति नंद कौ पूत।
जीव रह्यी आवन आसही,नातौ ह्यौ सूखी ठूँठ।।मोहै मौरै! भाँवति नंद कौ पूत।
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