अति आरस रस भीने

अति आरस रस भीनै।
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भुवन रंग जगै उपवन आये,धारै बसन वपु अति झीनै।
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एक सिराहनौ मिलित अति पौढे,भरै नैन श्रम सौ झुकै।
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मनहर मृदुल सहज कुंज शौभा,बीच हरित पात गुच्छ टकै।
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धरा गगन तरू अरू सैजा,झरै सब सौ सहज मृदुलाई।
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"प्यारी" सेवित सखिन योई रंगीलै,सैवे पराग ज्यो कुसुम पत्राई।

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