श्याम अधर
श्याम अधर
अधर अधीर हुई रस ताई,श्याम अधर ललचाए।
लै बीरी मुख माही धरीहै,दई अंगुरी पौर छुवाए।
पीक अधर दंतावली चमकत,ज्यौ मोतिन दए बिखराए।
करत मनुहार लाल लली कौ,देई रस देओ पिलाए।
करत जोरी अधर धरै अधरा,चर्बित पान चबाए।
कदै होय ऐसौ दरस प्यारी,नित चरणा टेर लगाए।
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