मोरी प्रीत रमण ते ऐसी

मौरी प्रीत रमण तै ऐसी।
जीवन डोर कौ साँसन से ज्यौ,भई दीपक बाती कै जैसी।
जैसों चातक स्वाति सौ करिहै,करै नैन पलक ज्यौ वैसी।
सागर मिलन कौ प्यासी ज्यौ सरिता,भई सौरभ चंदन तैसी।
कैसो कहूं कछु आवै समझ ना,"प्यारी" संग उन प्रीत है कैसी।

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