अंत चहूँ अब माधव

अंत चहू अब माधव।
पीर प्रतिक्षा बिरह तपन सब,मिलन निकरि आए आसव।
मौन मूक अंतर खट्पट् सब,एक अंक तेरे हो बस नीरव।
राह पथिक अरू आवन जावन,"प्यारी" सम्पूरण सब कारज।

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