मैं तो प्रेम जोग की जोगन
मै तो प्रेम जोग की जोगन।
ब्रम्हा कौन कहा का जानू,जानू बस एक गिरधर साजन।
यम प्रणयम नियम का कैसो,रीत प्रीत बस सुनीही काणन।
रोकत श्वास गति ना जोगू,चलै नाम आत-जात उन प्राणन।
नैन मूंद मौना धरू नाय,देखू खोलि नैन करती गायन।
नाय सिद्धि जन्तर मन्तर जानू,रोय बस आवै नैनहु बहावन।
उधौ जोग कहा अब सीखू,"प्यारी" बश सरबस उन हाथन।
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