नव दूल्हा दुल्हिन विहसै आवै।
उर लगी लाज भरी पिय प्यारी,पिय रंग बिलसै हिय लिपटावै।
धरै धीरे पद दोउ संग सकुचाते,कबु पद सौ पद अरूझत जावै।
भरा पथ कुसुम सौ अति रंगिला,अरू दिशि दुई सखिन सुमन बरसावै।
अति कोमल नवनीत सौ वपु,अटकै सुमन तुरति गिरि जावै।
"प्यारी"जोरि ऐसी सुनि ना देखि,इन सम ये कोउ उपमा ना भावै।

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