लाली हसन लगे अति मनोहारी

लाली हसन अति लागै मनौहारी।
जगावन हित शुक सारि खेल करते,लटक झूलत पट करत खिलारी।
परै- परै सेज दोउ देखें खोलि नैनन,बिथुरी अलक नैन आरस भारी।
लटकि पटा जई फिसरी गई सारि,परिही हसी खिल खिल सुकुमारी।
अबई भौर भई खिलि गयौ कुंजन,"प्यारी" भौर ऐसी जावै बलिहारी।

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