बीतै बरस रमण दरसन बिना

बीतै बरस रमणा दरसै बिनु।
तरसै नयन छबि इक तकनै-सु,बहै प्यासै सगरै रैना दिनु।
टेर गुहार करि नित मिलनै-कु,आवन नाय अबलौ ह्यौ सुनु।
परि धूमिल अब आस मिलन-हु,जानै लौटिहै "प्यारी" पिय बिनु।

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