अटक गए पिय निरखन सँग कोर

अटकि गए पिय निरखन संग कौर।
जई सम्मुख बैठि पलक ठाय दीन्ही,उठाए प्यारी देखि नैनन की कोर।
रूप राशि देखि अति अद्भुत,देखि जई जड भए पिय पौर-पौर।
शिथिल जानि पिय करी प्यारी युक्ति,पकरि कर लई गई पिय मुख ओर।
करत भोज रस रसीलै रस प्यारै,करे "प्यारी" दरस नवे नित होर।

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