रँगीली बरसी बन रस मेघा

रंगीली! बरसी बन रस मेघा।
बतिया रसभरी सुनत वारी,नैननि कौर चलत शर रेखा।
लिपटी उरतै पियकै आपई,बैठी अंक आप पिय सैजा। 
प्यासौ ढुरत कूप आजई,"प्यारी" अचरज प्रथमहु देखा।

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