हम जु राधा पद मकरंद अली
हम जु राधा पद मकरंद अली।
पोषित रसित लसित गूढ तृषित,सब गुण पाए इन चरणनहु तली।
मान अभिमान ज्ञान देहिन प्राण,सरबस उत्तही जित्तहु पग धर चली।
प्रणत मनत बनत सब कारज,सर धारी धूरि इन बलहु बली।
स्वरग बैकुंठ मोक्ष नाय मुक्ति,"प्यारी" चाह छाह इनकोई भली।
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