नैननि बाँवरे मानत नाहीं

नैननि बाँवरै मानत नाही।
बिनु देखे थारी सुरतिया प्यारै,इन्हु चैना आवत नाही।
देखि उमगि आवै अंसुवन धारै,सबई धीरा बहि जाई।
पीबत थकै नाही बुझिहै प्यासा,पीबत रूपई ओरि बढाई।
चालै उर कहनी म्हारी-ना सुनिहै,कहनी सुनिहै एकहु नाही।
धन इन नैनन पियही बसाए,बलिहारी "प्यारी" इन्हु-पै जाई।

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