कलश भरे
कलश भरै
कलश भरे लीन्है लूट रसधर।
दुई थाल सजै अधै श्रीफल,टटोलतौ कर श्याम करिए।
पकरि खेचत थाल औंधे,दूसर उपरि ज्यौ धरिए।
चंचल भुजंग चढि,ज्यौ विटप चमेली चढिए।
सर धरि गगरी,त्यौ छाछ रसिलौ भरिए।
फोडत लूटत दधि,जल जलधर लये लूटिए।
छेडत जो जोरि होवत,जोरा जोरि बरजोरि करिए।
दासी प्यारी बिनती चरणा,ऐसी बरजोरी हमहु संग करिए
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