दीपदान
दीपदान
करिहै दीपदान मैय्या लाला के ताई।
दीप बहावती मनौती मांगती,मांगत लालजु मंगल।
ऐकौ दीप बहाय कहियै,कोऊ करि नाय सकै अमंगल।
कहै दूजै दीप बहाय,पावै सब जग कौ ही ज्ञान।
बहाय तीजै दीप मांगती,करिहै नाय उधम बनिहै सुजान।
चौथै दीप बहाय कहिए,लागै कोऊ कौ नजरिया नाय।
पुनि पुनि मनौती मांगती प्यारी,पुनि पुनि दीप बहाय।
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