का सौ करू मै रस बतिया

का सौ करू मै रस बतिया।
कौन सुनै विध का सौ कहवू,रस उमगि परै जो नदिया।
उपमा उपमेय लावू कँहा सौ,जोई बरनै अणु द्वौ रसिया।
समुझै कौन रस सारन सारौ,कौन पढि सकै नैनन पतिया।
रस कौ बात "प्यारी" रसिकन जानै,यातौ जाने दोउ रस प्यारे रसिया।

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