अहो!सुनौ ललितै पिय प्यारी सखी।
कर जोरी तौसो अरज करत ह्यौ,देओ पुनि नैनन जिन जोरि लखी।
प्रेम भाव जग पुनि फैरो ह्यो,लिजौ ललित लडैति सुख टहल रखी।
जग भीर भारी रली दासी तौ,खोजो डाँट डपट राखौ संग सखी।
बल किरपा तोहरे दासी कहाई ह्यो,वैसो किजौ अनुगत निज "प्यारी" सखी।
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