चलत न उरपै जोर
चलत न उरपै जोर।
कहत-कहत गई हार जी मै तो,पिय आवै होय भोर।
धरि बिस्वास आस जोरि पुनि,नेक सौ देर दै तोर।
मानत नाय एक कही मौरी कोय,आकुल होय फिरै दोर।
यापै न जानौ पिय जानौ प्रीत पे,नाय दीजौ नैन इस ओर।
"प्यारी" तिहारी नित राह निहारै,पकरि पीर कौ छोर।
Comments
Post a Comment