एकहु पाती को न आयो जवाब

एकहु पाति कौ ना आयौ जवाब।
लिख लिख मन पतियां धरी चरणा,लिख दई उर बीती सब बात।
रोए रोए कही कबहु कही चुपही,कही इतनोई जाकौ ना हिसाब।
कह्यौ सह्यौ किस विध प्रेम पीरा,किस विध सह्यौ जग कौ फसाद।
ऐसौ करौ नाय कछु तौ कहवौ,दीजौ सुधारी "प्यारी" दशा खराब।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया