झाँकत मौहै रमण झरौखै |
झाँकत मौहै रमण झरौखै |
इकली मै बैठी आवै ना तबहु,डारै छुप-छुप डौरै मौपै |
जानि कै सतावै देख रोती मुस्कावै,मुस्कनि देखि हसै नैन रौतै |
वा की अदा बाँकी बाँकी मनावनि,बाँकै करावै कारज मौतै |
झलक दिखा आधी गए छुप बेगि,ढौंढै प्यारी पाछै बाँवरी हौकै |
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