ऐसो तज दी रमण मोहे

ऐसौ तज दी रमण मोहै।
ज्यौ मिलै नाय कबहु पल कौ,जानि अनजानि बनै खोये।
मुडि ना देखिहौ तज जावत ह्यौ,रूकै नाय देखत रोये।
गयै तो गयै नाय सुनै एकहुही,कान मूंद हित मेरे सोये।
कैसो पुकारू जो सुनि पुनि आवौ,"प्यारी" दीजौ उपाय कोय।

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