श्री वल्लभ मम् प्राण

मम् प्राण
श्री वल्लभ मम् प्राण।
सिंधु आनंद उमगि रस-सागर,चितवनी हरत हिय बाण।
भामिनी उर रहत नित निधि ही,प्रीती बश रहत सुजान।
केली कल क्रीडा सुरत निपुणा,टरत निज मानिनी मान।
चंचल चतुर चपल अति वल्लभ,प्यारी प्राणन हू कौ प्राण।

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