वरु न जग

वरू न जग
वरू ना झूठ्यौ जग को वर गिरधर।
कछु होय कछु ना होय साँवरौ,नाहि मोय आसरौ थारौ तजनौ।
वर मेरौ साँवल एकु आपहौ,नाय ओर कोउ वर मोय वरनौ।
चाहै कोउ कहि मोय राखिहै,संग तिहारै कितहुही रहनौ।
ओरहु कोय होय ब्रजहि बसावै,बिनु आप नाय जाय ब्रज बसनौ।
बिनती जै ही मेरौ गिरधर नागर,प्यारी निज चरणा धाम राखलौ

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