कमल माल पहिरे
कमल माल पहिरै दोऊ कमलै,इन कमल सौ घटी कमला उन शोभा।
अलिन भॉति आलिन चहुं ओरि,देख इन लोभ बढ़ा मन लोभा।
हास विहास सदन रंग गुंजित ,लए चुटकी है बढावै दोऊ मोदा।
रस भरी बतिया रसीली रैना की,करि करि सैन पूछै सखी नेहा।
भोर होर कहु ऐसी ना होनी,"प्यारी"देखि जैसी वीथिन-इन कुंजैहा।
....
दोहा---------
कुसुमन के सब कुसुम दोऊ,प्यारी श्यामा प्रियतम श्याम।
देस भेष चहै जौन रहू , टेरू चरणनि सुख सुखधाम।
Comments
Post a Comment