रमण मोहे मार दई

रमण मौहे मार दई जिवतोई।
प्रेम करी कोऊ पाप नाय की,तऊ काहे ऐसो दण्ड पई।
नाय नाय कही सौप ओर दी,मौरी नाय तैने गौर करी।
धीर भरै बोल मोय बोल के,भीतरहु तज दीन्ही तौ मोहि।
का सौ कहू कैसो कहू पीरा,मूक भई "प्यारी" वाणी गई।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया