वारत नौंन राई सखी

वारत नौन राई सखि ललिता।
रूप सजिलै रस के रसिलै,बंधिहै डोर एकहु रस प्रीता।
एक सो बसन भूषण सब एकसौ,रस एकसोई बनिहैर स मीता।
ऐसौ रूप देखत नाय थाकै,पीबत ज्योई चहै रहै पीता।
सहज मृदुल ऐसोई दोउ प्यारै,सहजन हित "प्यारी" ज्यौन बीता।

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