करि भेंट रमण

करि भेंट रमण मुस्कानै।
आनंद दोउन उर अति भारी,कहवै सुनै नैन सयानै।
पुलकित अंगनि हिय गति बेगि,भए जग सौ दोऊ बैगानै।
सरस सिंगार धोती पग धारि,रहै पट अंसनि लटकानै।
सखी "प्यारी"नित दरसन प्यासी,दैखे बिनु पलक गिरानै।

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