जानिए दो न
जानिए द्वौ ना पिय-प्यारी सहेली।
दोउ अलबेले जई सुमनि रसीले,सखी जानौ इन सौरभ अकेली।
रस अनुपम जलधि जई प्यारौ,जानियौ वीची रस सहजई केली।
देह प्राण पिय-प्यारी जो आपस,सम होई छावली आली हठेली।
निभृत जई ठाडै द्वौ हित-रस,भई विभिन्न पदारथ कौ रस-केली।
गाढ स्थिति भए पुंज प्रकाश-जो,"प्यारी" प्रति किरण एक-एकहु चेली।
Comments
Post a Comment