प्यारी नाचत बरखा संग सखियन , दैखत हस हस खडै बिहारी।
लागै कनक तन बूंद मोतियन , चमकत चम-चम अंग प्यारी।
पिय ओरि सैन कौर अखियन , मारत तीखै दोउ नैन कटारी।
पद छाप छलकै वारि रज-कण ,करत छप छप बहु प्रकारि।
जोरि करत देखि विहार उपवन , "प्यारी" निरखि निरखि जाए वारी।
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