चरण रज

चरण रज

श्यामा,चरण रज चाहू।
गहू निसी भौर जे ही चरणा,इन्ही महिमा गाऊ।
तैल फुलेल लगाय पलोटू,मखमल सो सहलाऊ।
बैठी रहू बनहि रज इनकी,ओर ठौर कहु ना जाउ।
शीश तेरे सो कोमल होउ,धरै पाम तहाँ बिछ जाऊ।
प्यारी चरणा दूर च्यौ राखी,बिनु दरशन मरि मरि जाऊ।

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