बूझो बात

बूझौ बात
बूझौ बात प्रभु कदै तो हमारी।
ज्यौ पूछी गज ग्राह तारण,त्यौ कदसी बनावौ हमारी लौ।
द्रौपदी चीर बढावतौ बनाई,चीर चुरातौ बनाई गोपिन कौ।
भिलनी बेर खावतौ बनाई,कदली छिलका खाई काकी सौ।
कोउ को हसतौ प्रीत सौ बनाई,प्यारी बूझौ कदै बनावौ कैसो।

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