प्यारी धर अधर बजावै वंशी
प्यारी धर अधर बजावै बंशी।
जावक रची पौर अंगुरी,छेद नचावै यौ ता-थई सी।
अरूण अधर यौ मुडै जो चंचु,शोभा नाई कहवै में आवै री।
झकै पाछै सौ पिय झुकै,नेक खुलै नैन मिल जावै री।
कर दुरा बंशी पिय आप ढुरै,अधर द्वौ प्यारी रही सजाई।
प्रेम खिलौने दोउ अडै जुड़ै रहै,"प्यारी" भरि भरि नैन सुख पाई।
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