मोहे सांवल भाय गयो

मौहे साँवल भाय गयौ।
तन मन टेढौ काज को टेढौ,टेढौ मनहु समाय गयौ।
खौस पखा पग लैके लकुटी पौरी,उर ठाडौ मुस्काय रह्यौ।
मीन सरस दृग मम उर सिंधु,डूबै तरै खेल करयौ।
"प्यारी" अरज तौसो लागी नाही छूटै,जग जतन करै-तौ करयौ।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया