ए री निहार लयै

ऐ री! निहारि लए श्यामाश्याम।
रंग सेज दुल्हु दुल्हिन से,परिहै पीयै रस अविराम।
श्यामल मेघ द्युति घन की तै,होयै एकम एक देहभान।
अलसै नैन बिथुरी अलकनि ह्यै,रसिलै अरूण अति अधरान।
अंकनि गाढ आबद्ध रसिक द्वै,"प्यारी" रहै योई भौर-शाम।

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