निरखै दुई आरस भरै चंद।

निरखै दुई आरस भरै चंद।
रंग सदन अरूझै दुई निकसै आवै धर पद पंकज मंद मंद।
उर पिय लटकि गल माल सौ प्यारी दै दुई भुज फंद।
जगै निसी रति हित भर रंग मगे ताई नाय अघात।
तै जई ज्यौई जम्हात प्यारी दए पिय चुटकी चटकात।
पिय प्यारी अंक लगै सहजई पिय सहज नेह बरसाय।
प्यारी ऐसेई छब बनी रहत भौर निश मुख सौ कहि न जाय।

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