न जी न रमण
ना जी ना रमण छड जइयौ कदि।
जिस विध संग राखौ रहूंगी तिहारै,चालू अगन सहज कहो चाल यदि।
कही करूगी सब मन की तिहारी,मन म्हारा राखौ संग जोड अजी।
बोली सब सुन जग की लूंगी,मौन तिहारा नाही सह्यौ जावै जी।
जावौ तौ संग मौहेहु लै जावौ,"प्यारी" बिन थारे जग रहनौ नही।
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