साँचो मेरो राधारमण
साँचौ मैरो धन प्यारौ राधारमण।
कुबेर निधि नाय रतन सागर मे,कोउ पै नाय ऐसौ जैसो मेरौ धन।
या धन सौ ह्यौ धनिक हु सबसौ,लूटै नाय छिन सकै याए कोउ जन।
जग को धन नाय जाय मरनौ संग,जे-मेरौ ऐसो धन संग जीवन मरण।
"प्यारी" अरज याए संग सदा रहवौ,जावू जित्तहु जावै संगहु रमण।
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